महानता। इस शब्द की अनेक परिभाषाएँ हैं। बँधे शब्दों में, स्वार्थ से ऊपर उठकर किये गए व्यवहार व्यक्ति को महान बनाते हैं। त्याग, समर्पण, प्रेम, परोपकार, निश्छलता, इत्यादि व्यवहार महानता के बीज हैं। लोकप्रियता। जरूरी नहीं कि लोकप्रियता महानता हो। सोशल मीडिया के दौर में यह बात और भी अहम हो जाती है। ऐसे में, महानता की हुई अपनी एक अनुभूति आपसे साझा करना चाहूँगा। जिसके सानिध्य में आकर आपका क़द बड़ा लगने लगे, जो आपको बड़े होने की अभिभूति करवा दे, वो महान है। आजकल चलन में इसका उल्टा देखने को मिलता है। लोग बड़प्पन बटोरते चलते हैं। महान लोगों से मिली बड़प्पन की अनुभूति औपचारिक नहीं, आत्मीय होती है। ऐसे व्यक्तित्व कभी उपदेश नहीं देते, बल्कि उनका जीवन, उनका व्यवहार ही गीता-रामायण होता है। जरूरत सिर्फ़ पढ़ने और अनुसरण करने की होती है। हमारे आस-पास बहुत-सी ऐसी सख़्शियतें होती हैं, जिनसे हम प्रेरित होते हैं, या हो सकते हैं । प्रेरणा का स्रोत यदि लोकल हो तो, यह और असरदार होता है। ऐसे व्यक्तित्व हमारे ही परिवेश में संघर्ष करके एक अनुकरणीय प्रतिमान बन जाते हैं। कोयले को उस कोयले से प्रेरित होना चाहिए,...
मदन और मोहन दोस्त थे। एक दिन वे मंदिर गए। मदन हमेशा तैयारी करके जाता था। तैयार रहना उसकी आदत ही नहीं, बल्कि लत थी। अपनी पढ़ाई, नौकरी, शादी यहाँ तक कि अपने बच्चों की भी फ्यूचर प्लानिंग करके रखा था। मंदिर के पुजारी ने दोनों दोस्तों से बोला, “ माँगो, भगवान दिल खोल के देंगे।” मदन लाइन में मोहन के पीछे था। वो झट-पट मोहन के आगे आ गया। जैसे ट्रेन की तत्काल टिकट बुक करवाना हो। पहले न किए तो फ़ुल! मदन अपनी मन्नतों की लिस्ट साथ लाया था। उसने लिस्ट खोली और भगवान के सामने पढ़ने लगा, “ यूपीएससी क्लियर करवा दीजिए, यूपीएससी वाली लड़की से शादी करवा दीजिए…” आवाज़ काफ़ी जोर-जोर से आ रही थी । पुजारी जी ने टोका, “ बेटा, मन में मन्नत माँगो, प्रभु समझ जाएँगे।” मदन थोड़ा झेंपा।जैसे-तैसे एक पन्ने की अपनी अर्ज़ी सुना डाली। जैसे कोई गृहस्थी वाला परचून की दुकान पर लिस्ट पढ़ता हो। अब मोहन की बारी आई। पुजारी जी, “ बेटा, थोड़ा शॉर्ट में ही रखना। लाइन बहुत लम्बी है।” परन्तु मोहन के पास कोई लिस्ट नहीं थी। उसने मन में बोला, “ प्रभु, माँगकर आपको शर्मिंदा नहीं करूँगा। आप जो भी देंगे उसी में संतोष करूँगा।” इतना मन में कह...
IPL (Indian Premier League) , ORS (Oral Rehydration Solution), इत्यादि कुछ ऐसे acronym हैं, जिनके full form के लिए दिमाग़ पे ज़ोर पड़ेगा। ये Acronyms Noun बन चुके हैं। AI भी इसी श्रेणी में आता जा रहा है। एक-आध पीढ़ी बाद Artificial Intelligence बहुत कम लोग याद रख पाएँगे। किसी acronym के अपने मूल शब्दों को विस्थापित या विस्मृत करने की दो शर्तें हैं। दोनों शर्तें एक साथ (AND condition) लागू होनी चाहिए। एक है शब्दों का बड़ा और उच्चारण में जटिल होना। बड़े होने के कारण उच्चारण में अधिक समय लगता है। जटिलता हमेशा भारी होती है। जिह्वा को भी भारी भरकम शब्द राह नहीं आते। इससे संचार में बाधा आती है। कानों का भी यही हाल है। उन्हें भी आसान भाषा में सुनाना पसंद है। ऐसे में Acronym जिह्वा और कानों का काम आसान कर देता देते हैं।जैसे SP ( superintendent of Police)। दूसरी शर्त है उन शब्दों का प्रचलित होना। उसमें दम होना। प्रचलित होना प्रख्यात होने से अलग है। FIR (First Information Report) प्रचलित है, लेकिन क्या प्रख्यात है? सुनते ही एक भय छू जाता है। इन दोनों शर्तों को पूरा करने के कारण ...
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