कच्चाई



वो

कच्चे मक़ान

कच्ची सड़कें

कच्ची गलियाँ

कच्चे आँगन

कच्चे दालान

कच्चे अरमान 

कच्चे मेल 

कच्चे खेल 

अब पक्के होते जा रहे हैं, 

लोगों के दिल भी पक्के हो रहे हैं।

पक्के, सख़्त पत्थर के जैसे!

-काशी की क़लम

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